२. ऐतिहासिक संदर्भ और उत्क्रांती
द्वितीय, समरेश बोस बनाम पश्चिम बंगाल: इस निर्णय ने अनुचितता की परिभाषा को और अधिक उदार बनाया। न्यायालय ने कहा कि केवल कामुकता का वर्णन ही अनुचितता नहीं है। लेखक का दृष्टिकोण और साहित्य का साहित्यिक मूल्य जाँचना आवश्यक है। एक सुसंस्कृत व्यक्ति को जो साहित्य केवल विकृत नहीं लगता, वह कानून के दायरे में अनुचित नहीं ठहरता।[10]
